फाइल पर कुण्डली मारकर बैठे अधिकारी,ईओ डब्ल्यू ने कहा.अधिकारियों के निर्देश पर होगी कार्रवाई
बिलासपुर 21 अक्टूबर 2021 (ए)। कोरोना काल में सरकारी कामकाज के दौरान प्रदेश में सैकड़ों हजारो शासकीय कर्मचारियो की असामयिक मौत हुई। कठिन समय मे सरकार ने अनुकंपा नियमो को शिथिल कर पीçड़त परिवारों को राहत देने कोई कोर कसर नहीं छोड़ा। बावजूद इसके बिलासपुर में जिला शिक्षा विभाग के अधिकारी अनुकम्पा नियुक्ति के समय पीçड़त परिवार से रूपया बनाने में किसी प्रकार का परहेज नहीं किया।
शिक्षा विभाग के तत्कालीन प्रभारी जिला शिक्षा आधिकारी पी. दाशरथी और विभाग में कई सालों से अंगद की पांव की तरह जमे बाबूओं ने कोरोना काल में अनुकम्पा नियुक्ति को अवसर में बदल जमकर हाथ साफ किया है।
अपात्र को नौकरी..पात्र को ठेंगा
विभाग के जाबांज अधिकारी और बाबूओं ने अनुकंपा के पात्र पीçड़त परिवारों से जहां प्रकरण मे त्रुटि सुधार और स्थान को लेकर लाखो रुपयों पर हाथ साफ किया। तो वहीं अयोग्य लोगो को लेनदेन कर नियुक्ति पत्र थमा दिया। इतना ही नहीं पैसे की मांग पूरी नहीं करने वालों को तकनिकी दिक्कत बता कर अनुकम्पा के लिए अपात्र भी बनाया।
जानकारी देते चलें कि जिला शिक्षा आधिकारी बिलासपुर ने 28 मई 2021 को अनुकंपा नियुक्ति प्रकरण मे त्रुटि सुधार के लिए संबंधितों की सूची जारी किया। सूची मे क्रम संख्या 11 मे मनमोहन सिंह पवार की मृत्यु के बाद पुत्रवधू श्वेता सिंह को अनुकंपा नियुक्ति दिया गया। तात्कालीन प्रभारी जिला शिक्षा आधिकारी ने नियुक्ति आदेश सरल क्रमांक 22 मे श्वेता सिंह को सहायक ग्रेड 03 के पद पर शासकीय उच्य. माध्यमिक शाला लाखासार विकास खंड तखतपुर पदस्थ किया।
आवेदन में तथ्यों को छिपाया गया
बताते चलें कि मनमोहन सिंह पवार के दो पुत्र है। दोनों ही पुत्र पूर्व से ही शासकीय सेवा मे है। बड़े पुत्र की पत्नी पहले से शासकीय सेवक है। जबकि श्वेता सिंह का पति बसंत प्रताप सिंह व्याख्याता के पद पर पूर्व से ही पदस्थ है।
जिला शिक्षा आधिकारी कार्यालय से 28 मई को जारी पत्र के क्रम संख्या 11 मे साफ लिखा है कि श्वेता सिंह का नाम अनुकंपा के लिए परिवार की तरफ से पेश किए गए मूल आवेदन पत्र मे नहीं है। मृतक के दोनों पुत्र शासकीय सेवा में है या नहीं इसका भी जिक्र शपथपत्र और मूल अनुकंपा आवेदन पत्र मे नहीं किया गया है। विभाग को जल्द से जल्द शपथ पत्र के साथ निर्धारित समय में जमा कर सूचित करें।
श्वेता को बचाने विभाग ने झोकी ताकत
अनुकम्पा नियुक्ति में गड़बड़ी का मामला उजागर होते ही जिला शिक्षा विभाग ने बयान दिया कि श्वेता सिंह दोनों शर्तो को पूरा करती हैं। उन्होने 28 मई से पहले ही शपथ पत्र जमा कर दिया है। शपथ पत्र में बताया गया कि उनके घर में कोई शासकीय सेवक नहीं है। लेकिन तात्कालीन प्रभारी शिक्षा अधिकारी ने नहीं बताया कि जब श्वेता सिंह ने शपथ पत्र देकर पारिवारिक जानकारी दी थीज्तो 28 मई को जारी सूची में बतायी गयी कमियों को क्यों मांगा गया।
सूत्रों की माने तो मामला उछलने के बाद विभाग के जिम्मेदार लोगों ने श्वेता को बचाने दस्तावेजों के साथ जमकर खिलवाड़ किया। विवाद थमते नहीं देख तीन सदस्यी जांच टीम का भी गठन कर दिया।
दस्तावेजों से किया गया छेड़छाड़
सूत्र ने बताया कि अनुकम्पा नियुक्ति के समय श्वेता सिंह बिलासपुर स्थित जैन इंटेरनेशनल स्कूल मे पदस्थ थी। जबकि विभाग के आदेश सरल क्रमांक 08 की अभ्यर्थी ऋषिका कश्यप से विभाग के जिम्मेदार लोगों की तरफ से पैसे की मांग की गयी। आर्थिक स्थिति ठीक नही होने के कारण ऋषिका का आवेदन विभाग के होनहार अधिकारियों ने निरस्त कर दिया। बताया गया कि घर मे शासकीय/ अशासकीय सेवक हैं इसलिए अनुकंपा नियुक्ति की पात्र नहीं है।
एक विभाग दो कानून
सवाल उठता है कि एक ही कार्यालय मे दो मापदंड क्यों है। समस्त प्रकरणों की सम्पूर्ण जानकारी होने के बाद भी तत्कालीन प्रभारी जिला शिक्षा आधिकारी ने मिलिभगत कर श्वेता को अनुकम्पा नियुक्त का आदेश थमा दिया। लेकिन ऋषका को अपात्र बना दिया।
अनुकम्पा नियुक्त प्रावधान
अनुकंपा नियुक्ति नियमो मे स्पष्ट प्रावधान है कि दिवंगत शासकीय कर्मचारी के घर मे यदि कोई पहले से शासकीय / अशासकीय नौकरी मे है तो अनुकंपा नियुक्ति की पात्रता नहीं होगी। बावजूद इसके तत्कालीन प्रभारी जिला शिक्षा आधिकारी ने जमकर भ्रष्टाचार करते हुए अवैध रूप से अपात्र को अनुकंपा नियुक्ति का आदेश थमा दिया।
जांच रिपोर्ट पर कुण्डली मारकर बैठे
ऐसा नहीं है कि शिक्षा आधिकारी कार्यालय से जारी अनुकंपा नियुक्ति संबंधी शिकायते उच्य आधिकारियों तक नहीं पहुची। सयुक्त संचालक लोक शिक्षण बिलासपुर संभाग से लेकर विभागीय सचिव तक मामला पहुचा। दिखावे के लिए जांच कमेटी बनायी गयी। रिपोर्ट भी पेश कर दिया गया। लेकिन कमेटी की रिपोर्ट को अभी तक खोला नहीं गया है।
रिपोर्ट में नियुक्ति को बताया गया गलत
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार श्वेता सिंह की अनुकम्पा नियुक्ति को लेकर तीन सदस्यीय टीम ने करीब 15 दिनों पहले रिपोर्ट जमा कर दिया है। रिपोर्ट में श्वेता की नियुक्ति को गलत बताया गया है। बावजूद इसके विभाग के अधिकारी और बाबू श्वेता सिंह को बचाते हुए जांच रिपोर्ट पर कुण्डली मारकर बैठ गए हैं।