बैकु΄ठपुर@कोरिया जिले के विभाजन पश्चात जारी धरना प्रदर्शन को पूरे हुए दो महीने

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शासन-प्रशासन की तरफ से नहीं मिल रहा कोई आश्वासन,जिले की अस्मिता बचाने जारी है धरना,कोरिया जिले में खड़गवां विकासखण्ड को शामिल करने की है मांग

नवीन जिले की घोषणा के बाद नए परिसीमन को लेकर बना हुआ है संशय,सत्ताधारी दल का भी कोरिया जिले को लेकर नहीं दिख रहा बेहतर संकल्प

रवि सिंह-


बैकु΄ठपुर 21 अक्टूबर 2021 (घटती-घटना)। कोरिया जिले के विभाजन पश्चात जारी धरना प्रदर्शन को पूरे हुए दो महीने। शासन प्रशासन की तरफ से नहीं मिल रहा कोई आश्वासन, जिले की अस्मिता बचाने जारी है धरना। नवीन जिले की घोषणा के बाद नए परिशिमन को लेकर बना हुआ है संशय। कोरिया जिले में खड़गवां विकासखण्ड को शामिल करने की है मांग। सत्ताधारी दल का भी कोरिया जिले को लेकर नहीं दिख रहा बेहतर संकल्प। आगे की रणनीति बनाने हो चुकी सर्वदलीय बैठक, शामिल हुए जनप्रतिधि व व्यापारी।
कोरिया जिले को विभाजित करते हुए दो जिलों में विभक्त करने का निर्णय प्रदेश के मुख्यमंत्री ने 75 वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लेकर इसकी विधिवत घोषणा स्वतंत्रता दिवस को दिए अपने अभिभाषण में कर दी थी। कोरिया जिला दो जिलों में विभक्त होगा और नवीन जिला सर्वप्रथम जो मुख्यमंत्री ने घोषणा की उसके अनुसार मनेंद्रगढ़ घोषित किया गया जिसका नाम भले ही विभिन्न शामिल हो रहे क्षेत्रों के लोगों के विरोध के पश्चात मनेंद्रगढ़ चिरिमिरी भरतपुर रखा गया जो अब एमसीबी के नाम से जाना जाएगा। कोरिया जिले के विभाजन के बाद से ही और नवीन एमसीबी जिले की घोषणा होते ही वर्तमान में संयुक्त रूप से ही स्थापित कोरिया जिले में हर तरफ विरोध जारी हो गया जो लगातार जारी है और यह कब तक थमेगा इसकी सही तिथि बता पाना मुश्किल है।
वैसे जबसे जिले का विभाजन हुआ है और जबसे नवीन जिले एमसीबी की घोषणा हुई है तभी से संयुक्त रूप से वर्तमान स्थापित जिले में कहीं मुख्यालय को लेकर मांग जारी है कहीं मुख्यालय छीन जाने का भय है तो कहीं शामिल या शेष रह जाने वाले क्षेत्रों को लेकर आंदोलन और धरना अनवरत जारी है। बैकुंठपुर जिला मुख्यालय में कोरिया जिले में शामिल या शेष रह जा रहे क्षेत्रों व विकासखण्डों को लेकर दो महीने से धरना जारी है, जिसका अंत या परिणाम क्या निकलकर सामने आएगा यह भविष्य के गर्भ है, वैसे अब बैकुंठपुर में जारी धरना जिसका नेतृत्व कोरिया जिला बचाव संघर्ष मोर्चा नामक मंच कर रहा है और जिसने यह घोषणा भी कर दी है कि अब आंदोलन तेज होगा यदि उनकी मांग नहीं सुनी गई।

सामाजिक राजनीतिक व अन्य कई संघो ने मंच को दिया समर्थन

कोरिया जिला बचाव संघर्ष मंच को सामाजिक, व्यावसायिक, राजनीतिक, धार्मिक व अन्य सभी तरह के गठित संघो ने समर्थन दिया जो दो महीने से जारी भी है, लगातार मिल रहे समर्थन के साथ यह संघर्ष मंच दो माह से अनवरत धरना जारी रखे हुए है वहीं इस दौरान क्रमिक अनशन भी प्रतिदिन जारी है जिसमे भी अपार समर्थन प्राप्त हो रहा है।

जिले में शामिल क्षेत्रों को लेकर संघर्ष मोर्चा की है मांग

कोरिया जिला बचाव संघर्ष मंच की मांग है कि कोरिया जिले में खड़गवां विकासखण्ड को शामिल रहने दिया जाय। कोरिया जिले की अस्मिता की बात करते हुए मंच की मांग है कि कोरिया जिले से यदि खड़गवां को अलग किया जाता है तो यह कोरिया जिले के अस्तित्व को लेकर एक कुठाराघात होगा वहीं खड़गवां विकासखण्ड के 50 प्रतिशत से ज्यादा ग्राम पंचायतों व जनपद पंचायत की सामान्य सभा से यह प्रस्ताव भी पारित कर कलेक्टर कोरिया को सौंप दिया गया है जिसमें खड़गवां के लोगों की भी इक्षा है कि उनको कोरिया जिले में ही शामिल रहने दिया जाय क्योंकि भौगोलिक रूप व दूरी के हिसाब से खड़गवां विकासखण्ड का अधिकांश हिस्सा बैकुंठपुर या कोरिया जिले के नजदीक है जो सहूलियत के हिसाब से जायज मांग भी है।

शासन प्रशासन सहित सत्ताधरी दल के जनप्रतिनिधियों का उदासीन रवैया

कोरिया जिले के विभाजन के बाद और जिले की अस्मिता को लेकर आज दो महीने से जारी धरने और क्रमिक अनशन के दौरान शासन प्रशासन सहित सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधियों का रैवैया धरने व जिला बचाव मंच के मांगो के प्रति उदासीन ही देखा जा रहा है। जैसा कि बताया भी जा रहा है नवीन जिले की घोषणा के बाद से ही शासन प्रशासन सहित सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधियों का पूरा ध्यान नवीन एमसीबी जिले के स्थापना व नवीन जिले में शामिल हो रहे या शामिल किए जा रहे क्षेत्रों को लेकर ही बना हुआ है,इसका कारण भी यह है कि नवीन जिले में शामिल क्षेत्रों में सत्ताधारी दल को राजनीतिक फायदा पहुंच सके यही एकमात्र प्रयास जारी है। कोरिया जिले के लोगों व जिले की अस्मिता को लेकर किसी का भी ध्यान नहीं है।

कोरिया जिला विभाजन योग्य नहीं था

वहीं कोरिया जिला बचाव संघर्ष मोर्चा के नेतृत्वकर्ताओं व जिलेवासियों का कहना है कि कोरिया जिले का विभाजन करना सही निर्णय नहीं था,कोरिया जिला वैसे भी अभी अविकसित था वहीं जिले में शामिल क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियां भी ऐसी नहीं हैं जिससे नवीन जिले के बाद भी पूरे जिले के नवीन जिले में शामिल लोग प्रसन्न हो सकेंगे या उनका क्षेत्र विकसित हो सकेगा। वहीं चिरिमिरी सहित मनेंद्रगढ़ शहर में जिला मुख्यालय की अलग अलग मांग और भरतपुर की स्थिति दूरी के हिसाब से वही रहने के मामले को देखते हुए भी जिले का गठन अनुचित है।


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