जमीन संबंधी धोखाधड़ी मामले में जेल गए संजय अग्रवाल ने पुलिस महानिरीक्षक को लिखा पत्र,प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्षता से जांच की मांग
रवि सिंह
बैकु΄ठपुर 04 अक्टूबर 2021 (घटती-घटना)। बैकुंठपुर के बहुचर्चित भूमाफिया संजय अग्रवाल जमीन सम्बंधी गड़बड़ी मामले में अब भूमाफिया संजय अग्रवाल ने पुलिस महानिरीक्षक को शिकायत पत्र लिखकर तत्कालीन पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, नगर निरीक्षक सहित कई पुलिस कर्मियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कार्यवाही की मांग की है।
बता दें कि बैकुंठपुर मुख्यालय के ही भूमाफिया संजय अग्रवाल को कुछ माह पूर्व गलत तरीके से कूटरचना करते हुए कई लोगों की जमीन हड़पने व उसका विक्रय करने के संबंध में प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तार करते हुए जेल में निरुद्ध किया गया था वहीं संजय अग्रवाल कई माह जेल की हवा खाने के बाद जमानत पर अभी जेल से बाहर हैं और गुप्त रूप से कहीं रह रहें हैं। संजय अग्रवाल ने पुलिस महानिरीक्षक को लिखे अपने शिकायत पत्र में यह उल्लेख किया है कि किस तरह उन्हें कार्यवाही का भय दिखाकर व एनकाउंटर तक कि बात कहते हुए पुलिस द्वारा ही डराया जाता रहा बाद में फिरौती के रूप में लंबी रकम भी उनसे वसूल ली गई जिसका वह मय सबूत साक्ष्य प्रस्तुत कर रहें हैं।
आरोप जो संजय अग्रवाल ने पुलिस पर लगाये हैं
संजय अग्रवाल ने अपने शिकायत पत्र में पुलिस महानिरीक्षक को संबोधित करते हुए लिखा है कि कुछ माह पूर्व जिसकी तिथि वह नहीं बता सकते उनके पास नगर निरीक्षक बैकुंठपुर एल पी पटेल आते हैं और मुझसे कहते हैं आप पुलिस अधीक्षक चंद्रमोहन सिंह से मिल लें ऐसा वह खुद चाहते हैं और उनकी तरफ से यह भी कहा गया है मुझसे की आपके खिलाफ मैं जिलाबदर की कार्यवाही तय करूँ। उनकी बातों को सुनकर जब मैं पुलिस अधीक्षक चंद्रमोहन सिंह से मिलने उनके कार्यालय गया तो उन्होंने बताया कि मेरे खिलाफ दो शिकायत उनके पास हैं जिसमें एक नागरिक एकता मंच की शिकायत है वहीं दूसरा एक दर्ज प्रकरण जिसका क्रमांक 131/17 और दोनों प्रकरण में जांच और दोनों मामलों में मुझे बचाने उन्होंने मुझसे 25 लाख रुपये की मांग की, मैंने उनकी बात सुनी और सीधे ना कहने की बजाए मैंने रकम उन तक नहीं पहुंचाई, इस मुलाकात के बाद कई बार मुझ तक यह खबर आई कि मैं पुलिस अधीक्षक को मैनेज कर लूं वरना वह मेरे विरोधियों से मिलकर मुझपर कानूनी कार्यवाही कर सकते हैं,मेरे द्वारा सभी संदेशो को नजर अंदाज करने की वजह से ही पुलिस अधीक्षक कोरिया चंद्रमोहन सिंह ने मेरे खिलाफ षड्यंत्र रचते हुए उसे अमली जामा पहनाना शुरू किया और 2 सितम्बर 2020 को पहली प्राथमिकी मेरे विरुद्ध दर्ज की गई, जबकि मामले में 1 सितम्बर 2020 को ही अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक धीरेंद्र पटेल ने जांच रिपोर्ट पुलिस अधीक्षक को प्रेषित की। 2 सितम्बर 2020 को पहुंचे जांच प्रतिवेदन पर उसी दिन एसएचओ बैकुंठपुर को पुलिस अधीक्षक द्वारा मार्क कर थाने भेजा गया और उसी दिन प्राथमिकी भी दर्ज कर ली गई। उसी दिन सुबह मेरे घर को भी पुलिस ने चारों तरफ से घेर छावनी में तब्दील कर लिया और महिला पुलिस व अन्य पुलिस कर्मियों की बड़ी तादाद ने मेरे घर को घेर लिया। उसी दौरान बैकुंठपुर निवासी मनोज गुप्ता मेरे घर पर ही उपस्थित थे और मेरा सहयोगी रोहित सिंह भी मौजूद था, पूरी तैयारी मेरी गिरफ्तारी की थी फिर भी सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक धीरेंद्र पटेल व नगर निरीक्षक मेरे साथ बैठे रहे और मुझे यह समझाते रहे कि पुलिस अधीक्षक चंद्रमोहन सिंह लखनऊ से हैं और वह मिज़ाज से गर्म हैं तुम को साहब ने जब बुलाया था उनकी मांग पूरी करनी थी जो उस समय 25 लाख की थी अब 1 करोड़ की है इसलिए 1 करोड़ देकर बच सको तो बच लो वरना साहब इतने प्रकरण लाद देंगे कि जिंदगी पूरी जेल में गुजरेगी और परिवार बर्बाद हो जाएगा,और माया धरी रह जायेगी। महिला पुलिस को लेकर भी समझाया गया कि यह आपकी पत्नी की गिरफ्तारी के लिए लाई गई हैं और तुम चाहो तो अभी भी हम मदद कर सकते हैं।पूरे मामले में जब मैंने किसी भी मांग को पूरा करने से मना कर दिया तब 14 दिसम्बर 2020 को रामकुमार रवि व रिम्पल सिंह से 2017 में जमीन खरीदी बिक्री संबंधी मामले में धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया गया और जिसमे प्रथम साक्ष्यों का परीक्षण भी नहीं कराया गया।इसी तरह फिर कई मामले दर्ज किए गए और शासकीय नहर सहित कई जमीन पर गलत कब्जा लेने का आरोप तय करते हुए मुझे जेल में ही निरुद्ध रखने का प्रयास किया गया।
जेल में निरुद्ध रहने के दौरान भी पुलिस का दबाव पैसे को लेकर बनता रहा
संजय अग्रवाल ने अपनी शिकायत में लिखा है कि जब वह जेल में निरुद्ध थे उस दौरान भी उनके ऊपर पुलिस का दबाव पैसों व जमीन सहित कई घर देने की बात को लेकर बनता रहा और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक व नगर निरिक्षक सहित एक आरक्षक उनसे न्यायालय की पेशी के दौरान मिलकर कहते रहे कि पुलिस अधीक्षक की मांग पैसों की पूरी करो और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक व नगर निरीक्षक को एक एक घर जो मेरे द्वारा निर्मित व बिक्री वाला घर है देने की बात का दबाव बनाया जाता रहा।लगातार दबाव के कारण और पुलिस द्वारा भय बनाये जाने के कारण मेरे स्वयं सहित पत्नी व एमबीबीएस डॉक्टर पुत्र व सर्जन साले को भी फंसाने की धमकियों के बीच भूमाफिया व बिल्डर ने पुलिस अधीक्षक की मांग स्वीकार करते हुए पैसे का भुगतान करना जब स्वीकार कर लिया तब 3 करोड़ रुपये में सौदा तय हुआ। संजय अग्रवाल के शिकायत के अनुसार इतनी तेजी से कई प्रकरण दर्ज किये जा रहे थे कि वह मजबूर भी होता गया।
कैसे दिया पैसा भू-माफिया बिल्डर संजय अग्रवाल ने बताया
संजय अग्रवाल ने पुलिस महानिरीक्षक को लिखे शिकायत पत्र में बताया है कि उसने किस तरह पैसे का भुगतान फिरौती रकम के रूप में की। संजय अग्रवाल ने बताया कि उसे पुलिस द्वारा ही बताया गया कि वह बिलासपुर के कृष्ण कुमार श्रीवास्तव से जाकर मिले व वह जैसा कहे उस तरह से भुगतान करे, पुलिस की बातें मानकर खुद को बचाने जब वह बिलासपुर पहुंचा उसे वह व्यक्ति जिससे संजय अग्रवाल का कोई पूर्व का परिचय नहीं था वह एक तय जगह पर मिला, संजय अग्रवाल ने शिकायत में लिखा है कि पुलिस द्वारा यह भी समझाया गया था कि कैसे उसे अपने घर से पैसों व चेकबुक व कपड़ों को व्यवस्था करनी है उसी अनुसार वह व्यवहार करता रहा वहीं पुलिस द्वारा यह भी कहा गया कि पुलिस की हर पल उसपर निगाह होगी और वह कहे अनुसार नहीं करता है तो तत्काल गिरफ्तारी तय करते हुए फिर से जेल में डाल दिया जाएगा। संजय अग्रवाल ने शिकायत में लिखा है कि उसने बिलासपुर जाकर कृष्ण कुमार श्रीवास्तव को पुलिस द्वारा कहे अनुसार 30 लाख नकद व भारतीय स्टेट बैंक का 2 करोड़ का चेक व सेंट्रल बैंक का 70 लाख का चेक कुल 3 करोड़ रुपये सौंप दिया गया,जिसकी जानकारी बैंक खातों से किये जाने की बात भी उन्होंने की है वहीं चेक का क्रमांक भी दिया है। पूरे मामले में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक कोरिया चंद्रमोहन सिंह, डीएसपी धीरेंद्र पटेल, नगरनिरिक्षक व आरक्षक का नाम नामजद लिखा है संजय अग्रवाल ने और यह भी कहा है शिकायत में की उस दौरान कृष्ण कुमार श्रीवास्तव और पुलिस अधीक्षक की मोबाइल पर बातें हुईं हैं उसकी काल डिटेल से भी जानकारी निकाली जाकर जांच कर कार्यवाही की उन्हें उम्मीद है।
पुलिस महानिरीक्षक की जांच होगी महत्वपूर्ण
पूरे मामले में शिकायत की जांच पुलिस महानिरीक्षक के विवेक पर निर्भर है वैसे यदि फिरौती स्वरूप राशि यदि वसूली गई तो मामला गम्भीर है और पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया भी है क्योंकि इस मामले में पुलिस अधीक्षक सहित डीएसपी नागरनिरिक्षक व आरक्षक तक पर आरोप हैं। अब क्या कार्यवाही होती है देखने वाली बात होगी।