बैकुंठपुर।

मनेंद्रगढ़ अम्बिकापुर मुख्य मार्ग पर सैकड़ो छोटे बड़े वृक्ष कोरिया वनमंडल के जमद्वारी घाट के पहाड पर और मनेन्द्रगढ़ वनमंडल के नर्सरी के पहाड पर गिर सकने की अवस्था में अपनी जड़ को पकड़े खडे हैं। शीर्षक से पूर्व प्रकाशित हमारी खबर को मनेन्द्रगढ़ वनमंडल के वनमंडलाधिकारी ने गंभीरता से लेकर नेशनल हाइवे के कार्यपालन अंभियंता अम्बिकापुर को पत्र क्रमांक/ त. अ./2021/2722 दिनांक 2 जुलाई 2021 के तहत पत्र लिखकर कहा कि एनएच 43 कटनी- गुमला राष्ट्रीय राजमार्ग (मनेन्द्रगढ़ छत्तीसगढ़/मध्यप्रदेश ) सीमा से डुमरिया तक के प्रकरण में लीनियर प्रस्ताव होने के कारण अ.प्र.मु.व.सं (भू- प्रबंध/व.सं.अ.) छत्तीसगढ़ का पत्र क्रमांक/ भू- प्रबंध/विविध/115-645/794 रायपुर, दिनांक 28.04.2020 एक वर्ष के लिए अनुमति दी गई। कार्य करने के दौरान कई स्थलों पर वन विभाग की चैनलिंक, फेंसिग, एवं नर्सरी जाने का रास्ता क्षतिग्रस्त हो गया है। इसे तत्काल सहीं कराएं। साथ ही ऐसी शिकायत प्राप्त हो रही है कि कई स्थलों पर घाटी में सीधी कटिंग कि गई है जिससे भू-क्षरण / कटाव बढने तथा खडे वृक्ष गिरने की कगार पर हैं। अत: वन विभाग के क्षेत्रीय अधिकारियों के साथ संयुक्त निरिक्षण कराके आवश्यकतानुसार भू-क्षरण/कटाव को रोकने को हेतू समुचित उपाए करें। सवाल यह पैदा होता है कि क्षरण/कटाव को रोकने के हेतू समुचित उपाय के लिए दस्तावेजी प्रकिया में धीमी गति क्यों? जैसे एक इंसान की जान को बचाने के लिए खर्च कर गंभीरता से इलाज किया जाता है वैसे ही वर्षों से पहाड़ों पर गिरने की अवस्था में खड़े वृक्षों को सुरक्षित व संरक्षित करने वाले इलाज के बजट स्वीकृति में देरी क्यों? जबकि जंगलों में करोड़ों रूपए का बजट वृक्षारोपण के नाम पर फूंक दिया जाता है तो वर्षों से जमे आज धाराशाही हो सकने की कगार पर खड़े वृक्षों को सुरक्षित व संरक्षित करने में देरी क्यों? वन एवं जलवायु परिवर्तन के अधिकारी वन की जमीन पर वर्तमान में गिरने की अवस्था में खडे वृक्षों को क्या धीरे-धीरे एक-एक कर करके गिरता देखना चाहते हैं?