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Thursday 06 May 2021 03:05 AM

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मनेन्द्रगढ़ @ पार्षद निधि को संक्रमण के रोकथाम में खर्च की अनुमति,धरातल पर कोई पहल नही



मनेन्द्रगढ़ @ पार्षद निधि को संक्रमण के रोकथाम में खर्च की अनुमति,धरातल पर कोई पहल नही 04-05-21 12:42:05

- आशीष सिंह-
मनेन्द्रगढ़ 03 मई 2021 (घटती-घटना)।
छत्तीसगढ़ का लगभग हर शहर व नगर बीते एक माह में कोरोना संक्रमण की भयावकता से गुजर रहा है ,लोगों के सामने अपनी जिंदगी बचाने की चुनौती आ खड़ी हुई है वही कई लोग तो सिर्फ कोरोना संक्रमण के बचाव में प्रयुक्त होने वाले सामानों की कमी के कारण काल के गर्त में समा गए हैं ,और जब इन कमियों और विषमताओं पर छत्तीसगढ़ सरकार की नजर पड़ी तब स्थानीय स्तर पर जरूरतमंद लोगों को सामग्री व संसाधन की कमी का आभाव ना पड़े इसलिए छत्तीसगढ़ सरकार के नगरीय अभियंता (अनुदान )नगरी प्रशासन रायपुर ने 24 अप्रैल 2020 को सभी नगरीय निकाय के प्रमुख को ,सिर्फ जहां आगामी नगरीय क्षेत्र में चुनाव होने हैं को छोड़कर पत्र के माध्यम से अवगत कराया कि कोरोना संक्रमण के तीव्र विस्तार के रोकथाम एवं जनमानस को राहत पहुंचाने को दृष्टिगत रखते हुए सहानुभूति पूर्वक विचार कर नगर पालिका परिषद व नगर पंचायत के अध्यक्ष, पार्षद एवं एल्डरमैन निधि से संक्रमण की रोकथाम हेतु उपाय करने एवं सुसंगत उपकरण तथा अन्य आवश्यक सामग्री क्रय करने की अनुमति प्रदान की जाती है।मगर मनेन्द्रगढ़ नगर पालिका क्षेत्र के नागरिकों का इसे दुर्भाग्य ही कहा जाएगा क्योंकि इस आदेश का जमीनी स्तर पर अभी तक कोई वास्ता ही नहीं दिख रहा है, जबकि शासन ने ऎसे विपदा की स्थिति में स्थानीय जनप्रतिनिधियो को संक्रमण की रोकथाम के उपाय करने के लिए उनकी निधि खर्च करने हेतु स्वतंत्र भी कर दिया है।फिर भी ऐसे लोगो की क्या मजबूरी है कि वे इस दिशा में कोई कदम क्यो नहीं उठा पा रहे हैं। जो पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया है, कि आखिर परिषद में बैठे जिम्मेदार लोगों ने जरूरतमंद नागरिकों के स्वास्थ्य व भूख की दिशा में पहल क्यो नहीं कर रहे हैं, जबकि कोरिया जिले में बीते 11 अप्रैल से ही लॉक डाउन की स्थिति निर्मित हो गई है और विभिन्न वार्डो में निवासरत ऐसे कई जरूरतमंद लोग स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर आशा भरी नजरों से देख रहे हैं ।अब तो लोगों ने कहना भी शुरू कर दिया है कि परिषद में इच्छाशक्ति का अभाव है,जिसके कारण इस विपदा में भी वे कुछ नही कर पा रहे है और वे लोग अपनी राशि का उपयोग नहीं रहे हैं।बताया जाता कि ऐसी विपदा में किसी भी सामग्री व साधन को खरीदने संबंधी रीति का पालन करना भी आवश्यक नहीं होता है ,मात्र कुछ औपचारिकताओं के साथ ही यह सब संभव है इसके बाद भी सक्षम लोग हाथ पर हाथ धरे बैठे है इसीलिए नागरिकों के मन में सवाल तो पैदा होंगे। बहरहाल जो भी हो मगर इस आपदा में एक सामान्य व्यक्ति भी बिना संसाधन के कोरोना संक्रमण के इस दौर में भी लोगो की मदद करने के लिए तत्पर रहता है और ऐसी दशा में नगर पालिका परिषद के पास शासन के आदेश आने के बाद इस विषम परिस्थिति में समुचित आर्थिक उपलब्धता होने के बावजूद भी संक्रमण की रोकथाम हेतु उपाय करने एवं सुसंगत उपकरण, सामग्री क्रय करने में कोताही तो बरती जा रही है,कहीं ऐसा तो नहीं की इस आपदा के खत्म होने के बाद खेला करने की कोई रणनीति बन गई हो।

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