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Thursday 06 May 2021 04:05 AM

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बैकुंठपुर @ लॉकडाउन के 24 दिन बीते,कड़ाई से नियमों का पालन फिर भी कोरोना क्यों बेकाबू?



बैकुंठपुर @ लॉकडाउन के 24 दिन बीते,कड़ाई से नियमों का पालन फिर भी कोरोना क्यों बेकाबू? 04-05-21 12:40:05

- रवि  सिंह-
बैकुंठपुर  03 मई 2021 (घटती-घटना)।
जिले में लॉकडाउन के 24 दिन हो चुके हैं प्रशासन कड़ाई से नियमों का पालन भी करा रही है, नियमों का पालन कराने वाले अधिकारी क्या मास्क नहीं लगा रहे हैं या फिर अपनी सुरक्षा को लेकर ही गम्भीर नही हैं क्योंकि वे लगातार संक्रमित हो रहें है। लॉकडाउन लगा हुआ है लोग घरों में है फिर भी कोरोना बेकाबू है साथ ही टीकाकरण भी जारी है सब लोग कोरोना वायरस सक्रमण से बचना चाहते हैं कोई भी इसके चपेट में नहीं आना चाहता फिर भी कोरोना बेकाबू है। आपदा में अवसर है नियमों में चूक है अनुमति में कमियां है लोग परेशान हैं फिर भी कोरोना की चैन नहीं टूट रही है। 24 दिनों के लॉकडाउन में संक्रमण की संख्या में कमी नहीं हुई है बल्कि संक्रमण में बढ़ोतरी ही हुई है। सारे नियमों के बावजूद कोरोना बेकाबू है। ऐसे कई सवाल हैं जिसका जवाब किसी के पास नहीं है सिर्फ लोग यह पूछ रहे कि आखिर कोरोना कैसे और कब खत्म होगा।
वाह रे प्रशासन की नीति
 कोरोना काल मे जहाँ विवाह के लिए प्रशानिक मंजूरी मिल रही है, कई फैक्टरी में उत्पादन भी जारी है माल लाने ले जाने पर कोई अड़चन नहीं बाकयदा उसके लिए नियमानुसार समय निर्धारित किया गया है वहीं आम लोगो के साथ छोटे व्यापारियो पर स्थानीय प्रशासन की चलानी कर्यवाही जारी रख उन्हें परेशान किया जा रहा है। इस कोरोना से आम जनजीवन पूरी तरीके से अस्त व्यस्त है जहां किसान अपने खेतों में लगाए फसल को बर्बाद होते अपनी आंखों से देख रहे हैं। वही उन्हें उस फसल को बेचने किसी बाजार की व्यवस्था के लिए कोई ठोस पहल सरकार के द्वारा नहीं की जा रही है। भवन निर्माण की अनुमति तो है पर भवन सामग्री बेचने वाले दुकानदार समान बेच नही सकते। जहाँ विवाह की अनुमति प्रशासन के द्वारा दी तो जा रही है पर उन्हें अपनी आवश्यकताओं के तहत किराना सामान, कपड़ा, लेने की अनुमति नहीं। जैसे-तैसे चोरी- छुपे दुकानदार किसी जरूरतमंद को सामान दे भी दे तो उनके ऊपर स्थानीय प्रशासन का डंडा चलता हुआ नजर आ रहा है। प्रशासन की इस दोहरी मानसिकता और आम लोगों को अनावश्यक तंग करने का आरोप छोटे व्यवसायियों ने लगाया है। छोटे छोटे व्यवसायियों का कहना है कि यदि लॉकडाउन में सभी चीजों का पूर्ण रूप से बंदी है तो ऐसे में फैक्टि्रयों में उत्पादन परिवहन आदि पर भी प्रशासन को रोक लगाते हुए सख्त कर्यवाही करनी चाहिए जिससे यदि बाहर से ही माल नहीं आएगा तो व्यवसाई उसे बेचेगा भी नहीं। प्रशासन को सुविधानुसार सभी व्यवसायियों को अपनी रोजी रोटी कमाने व खाने के लिए एक निश्चित समय की सहूलियत उन्हें देनी चाहिए। परेशान हुए व्यापारियों ने यह भी बताया कि वह अपना जीएसटी व एक नंबर के बिल में वह अपना सामग्री लाकर उसे ही चोरों की तरह बेचने को मजबूर है। प्रशासन को जहां आवश्यक वस्तुओं पर एक निश्चित समय देकर लोगों के सहूलियत पर विचार करना चाहिए वही समाज में अजब विडंबना है की नशीली पदार्थ भी चोरी छुपे बिक रहे हैं वही जरूरतमंद किसी दुकान से बिस्किट का पैकेट ले ले रहे हैं तो उन पर चलानी कर्यवाही हो जा रही है ऐसे में रोजमर्रा की जरूरतों और दिहाड़ी मजदूर अपने दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं और उनके आवश्यकता को पूरा करने के लिए व्यापारी भी प्रशासन की नजर में चोर बन गए हैं।

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