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Friday 28 Feb 2020 08:02 AM

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पत्थलगांव @ चलती गाड़ी उड़ती धूल



पत्थलगांव @ चलती गाड़ी उड़ती धूल 13-02-20 12:29:02

,पता नहीं आखिर कब सुधरेंगी खस्ताहाल एनएच-43 सड़क की स्थिति
निर्माण की धीमी गति से ग्रामीण एवं राहगीर हैं परेशान,ग्रामीणों को सता रही गंभीर बीमारी की चिंता
-आकाश शर्मा-
पत्थलगांव 12 फरवरी 2020 (घटती-घटना)।
पत्थलगांव से कासाबेल तक लगभग तीन सालों में धीमें गति से निर्माणाधीन एनएच 43 सड़क की हालात किसी से छिपी नहीं हैं। यहां आलम यह है कि दिनभर धूल भरे गुब्बारों से एनएच के बगल के रहवासी व राहगीरों का जीना एवं चलना मुश्किल हो गया है। अन्य राज्यों को जोड्ने वाली इकलवती निर्माणाधीन एनएच सड़क के खराब हालात के साथ सड्कों से उड़ने वाली धूल से वाहन चालक सहित आम आदमी यहां से निकलना मुश्किल हो रहा है।
विदित हो कि एनएच 43 पत्थलांव से कासाबेल तक ठेकेदार के द्वारा सड़क निर्माण करने हेतु खुदाई कर मिट्टी से पाट दी है परन्तु निर्माण कार्य की धीमी गति से ग्रामीण क्षेत्र के रहवासी परेशानी का सामना कर रहे है। उनका कहना है कि धूल से राहत हेतु ठेकेदार द्वारा सड़कों पर नियम के बावजूद पानी नही डाला जा रहा है, जिससे हम परेशान है और हमारे बच्चों व बुर्जुगों पर इसका स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। अन्य राज्यों को जोड़ने वाली मुख्य सड़क होने के बाद जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। उनके दिमाग में एक ही सवाल सताये जा रहा है कि हम किसको अपना दुखड़ा सुनाये जो कि इस परेशानी से निजात दिला सके, प्रशासन केवल आश्वासन तक ही सिमित रहता है इससे बाद कुछ ध्यान नही दिया जाता है। उसका खामियाजा आमजन को तमाम प्रकार की पेरशानियो का सामना कर चुकाना पड़ता है। यही हालात रहे तो ग्रामीण जनता कभी भी सड़को पर आ सकती है।
वहीं एनएच की सड़को के निर्माण का कार्य कछुआ गति से चलने के बाद भी कुछ समय अंतराल मे रूक जाता है। जब भी किसी अधिकारी या जनप्रतिनिधियो से बात की जाती है तो वही रटा रटाया जवाब मिलता है। किसी भी स्थान पर सड़कों का निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदार को विभाग द्वारा भले ही निर्देश दिये जाते है कि जब तक कार्य पूर्ण न हो जाये उक्त क्षेत्र मे सतत पानी का छिड़काव करना होगा। लेकिन ठेकेदार अपनी मदमस्त चाल के आगे निर्देशो की कोई परवाह नही करता। निर्माण कार्य के दौरान ठेकेदार द्वारा हो हल्ला मचाने पर पानी का छिड़काव किया जाता है अन्यथा धूल के गुब्बारो के बीच आमजन को विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओ को झेलने विवस होना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि इन सड़कों पर भारी वाहनों के आवागमन से दिनभर धूल के गुब्बार उड़ते रहते हैं। जिस कारण काफी देर तक चालकों को सड़क पर कुछ दिखाई नहीं देता। सड़क पर उड़ने वाली धूल से ग्रामीण क्षेत्रों का बुरा हाल है। धूल में सांस लेने से सड़क किनारे बसे व वहां के दुकानदारों में दमा होने का अंदेशा बना हुआ है। दुकानों में रखे सामान पर भी धूल जमा हो जाती है।

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