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बैकु΄ठपुर@ नजीर के 17 साल पर यवत के 5 साल भारी



बैकु΄ठपुर@ नजीर के 17 साल पर यवत के 5 साल भारी 13-01-21 11:35:01

अविभाजित मध्यप्रदेश मे 2 साल व छत्तीसगढ़ में 3 साल रहे कांग्रेस के जिलाध्यक्ष
-रवि सिंह-
बैकु΄ठपुर 13 जनवरी 2021  (घटती-घटना)। अविभाजित मध्यप्रदेश 1998 में जब विधानसभा चुनाव हुआ उस समय कोरिया जिले के जिलाध्यक्ष यवत सिंह थे। उस समय जिले में दो विधानसभा सीट  बैकुण्ठपुर व मनेंद्रगढ रहा। उस वक्त जिलाध्यक्ष के प्रभावशाली ढंग से कार्य करने के कारण इन दोनों सीटों पर कांग्रेस का कब्जा था। बैकुण्ठपुर विधानसभा सीट से विधायक डॉ. रामचन्द्र सिंहदेव यानी कि कोरिया कुमार ने भाजपा के उम्मीदवार द्वारिका प्रसाद गुप्ता को हराया था, वहीं मनेंद्रगढ़ विधानसभा सीट से गुलाब सिंह ने बीजेपी के चंद्रप्रताप सिंह को हराया था। 01 नवम्बर 2000 को जब छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ तो विधानसभा वार सदस्यों की संख्या के आधार पर नई सरकार का गठन हुआ था। बहुमत के आधार पर कांग्रेस की सरकार बनी, जहां छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री स्व. अजीत प्रमोद जोगी बने वहीं जिला कोरिया से स्व. रामचंद्र  सिंहदेव छत्तीसगढ़ राज्य के वित्त मंत्री बने। यदि छत्तीसगढ़ के इतिहास की बात की जाये तो कोरिया जिले में कांग्रेस के पहले जिलाध्यक्ष रहे। और छत्तीसगढ़ गठन के बाद पहला विधानसभा चुनाव सन 2003 में हुआ उस समय भी यवत सिंह कांग्रेस के जिलाध्यक्ष थे। इनके नेतृत्व में जिले में विधानसभा चुनाव लड़ा गया और इसमें भी कांग्रेस को दोनों विधानसभा में जीत मिली। जिसमें भी स्व. रामचंद्र  सिंहदेव बैकुण्ठपुर से तथा गुलाब सिंह मनेंद्रगढ़ से विधायक चुने गये। जिला अध्यक्ष के तौर पर यवत सिंह का 5 साल का कार्यकाल चुनावी नेतृत्व की दृष्टि से काफी अच्छा था।
विधानसभा वार लगातार सफलताएं के अलावा जनपद, जिला पंचायत एवं अन्य नगरीय निकायों में भी इनके कार्यकाल में कांग्रेस का कब्जा बना रहा। कांग्रेस की ओर से अविभाजित मध्य प्रदेश तत्पश्चात छत्तीसगढ़ में सबसे सफल जिलाध्यक्ष में यवत सिंह का नाम मील का पत्थर है। ईमानदारी के साथ सत्ता और संगठन में सामंजस्य, कार्यकर्ताओं को लगातार उत्साहित कर एकजुट बनाए रखने की कला इनके कार्यकाल में सदैव परिलक्षित होती रही है। साथ ही इनकी ईमानदार छवि सबको पसंद आती है। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष रहते हुए उन्होंने कांग्रेस को कोरिया जिले में जो ऊंचाइयां और मुकाम प्रदान किए वह बाद में देखने सुनने को कहीं नहीं मिला। इनके जिलाध्यक्ष के पद से हटने के बाद छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में कांग्रेस 15 साल के लिए सत्ता से बाहर हो गयी। जबकि इसी बीच इन्होंने जो काम 5 साल में किया वह काम वर्तमान जिलाध्यक्ष नजीर अजहर ने 17 साल में भी नहीं कर पाए। वर्तमान में जो पूरे प्रदेश में सत्ता विरोधी लहर थी तब 2 साल पूर्व कोरिया की तीनों सीटें 15 वर्ष के वनवास के बाद पुनः कांग्रेस के खाते में आ गयी। पर इसे संगठन और जिलाध्यक्ष की मजबूती नहीं अपितु 15 वर्ष की सत्ता विरोधी लहर और बदलाव के बयार की कहानी कही जा सकती है। बावजूद इसके जिलाध्यक्ष के गृह विधानसभा में निर्वाचित वर्तमान विधायक मतगणना के दिन अंतिम राउंड तक कड़ी मशक्कत का सामना करना पड़ा था और फिसलते-फिसलते ही जीत हासिल हुई थी। यदि कांग्रेस के वर्तमान जिलाध्यक्ष की तुलना पूर्व के जिलाध्यक्ष यवत सिंह से की जाए 17 साल पर उनका 5 साल भारी रहा।
यवत सिंह के कार्यकाल में संगठन मजबूत था सबको साथ जोड़ कर चलते थे  
वर्तमान समय कांग्रेस का संगठन कमजोर होता दिख रहा है। जिस पर जिलाध्यक्ष का कोई पकड़ नहीं दिख रही है जहां यवत सिंह एक गावं व कृषक के रूप में संगठन में थे वहीं वर्तमान जिलाध्यक्ष व्यापारी के तौर पर संगठन में है। और संगठन को व्यावसायिक के तौर पर ही चलाते है। संगठन के एकजूटता के ताकत पर ही चुनाव लड़ा जाता है। चुनाव में संगठन की भूमिका काफी अहम होती है। वधायक से भी बड़ा पद जिलाध्यक्ष का माना जाता है। क्योंकि विधायक एक सीमित क्षेत्र के जनप्रतिनिधि होते हैं परंतु यदि जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में विधायक चुनाव लड़ते है। जिले की सभी सीटें कोई पार्टी विशेष जीतकर आती है तो सभी विधायकों के ऊपर आलाकमान के तौर पर जिलाध्यक्ष का नाम आता है। आज जिस प्रकार कांग्रेस के जिलाध्यक्ष संगठन को चला रहे हैं। उससे पूरा संगठन टूट कर बिखर चुका है। अपनी ही सत्ता होते हुए संगठन,सत्ता और कार्यकर्ताओं के बीच कोई सामंजस्य और समावेश नजर नहीं आता।
संगठन में एकता नाम का शब्द खत्म होता दिख रहा...
जिला अध्यक्ष व जनप्रतिनिधियों के बीच सामंजस्य ना होना बड़ा प्रश्न है ?

जिस समय यवत सिंह जिला अध्यक्ष हुआ करते थे, दोनों विधायक व जिलाध्यक्ष के बीच का  सामंजस्य काफी अच्छा हुआ करता था जिसका आज भी मिसाल सुनने को मिलते है जब कभी तुलना की बात आती है तो संगठन में यवत सिंह का नाम लिया जाता है। यवत सिंह से 5 साल जिलाध्यक्ष रहे पर वह 5 साल कांग्रेस के लिए बेमिसाल रहा पर वही वर्तमान जिला अध्यक्ष का कार्यकाल 17 साल का हो चुका है, पर 17 साल में पहली बार उनके नेतृत्व में 3 सीटें मिली है पर जिला अध्यक्ष का सामंजस्य सिर्फ एक ही विधायक के साथ अच्छा माना जा रहा है। बाकी दो विधायक से उनकी दूरियां साफ देखी जा रही हैैं। संगठन की बॉडी भी उतनी मजबूत नहीं है। संगठन में विद्रोह की स्थिति है, जो संगठन को अंदर ही अंदर खोखला करता जा रहा है। जिसकी किसी को परवाह भी नहीं है और ना कोई संगठन के बारे में सोच रहा है। कोरिया जिले में सत्ता के कई केंद्र हैं। संगठन अलग कार्य कर रहा है, जनप्रतिनिधि अलग कार्य कर रहे हैं। सीनियर नेताओं की पूछ परख ना होने से कई केंद्रों का निर्माण हो चुका है। इसे जिलाध्यक्ष की कमी कहीं जाए या संगठन और सत्ता में तालमेल का अभाव, परंतु आने वाले वर्षों में यह पार्टी को नुकसानदेह साबित करने वाला होगा।


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