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Wednesday 16 Jan 2019 12:01 PM

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अम्बिकापुर@ अव्यवस्थाओं से घिरा हुआ है मेडिकल कालेज अस्पताल



अम्बिकापुर@ अव्यवस्थाओं से घिरा हुआ है मेडिकल कालेज अस्पताल 09-01-19 10:57:01

सीटी स्केन की नही है व्यवस्था,एक्सरे कराने में भी गंभीर मरीजों को घंटो लगानी पड़ रही है लाईन
-एस. एल. वर्मा-
अम्बिकापुर 09 जनवरी 2019 (घटती-घटना)।
संभाग मुख्यालय में स्थित संभाग का सबसे बड़ा अस्पताल जिला अस्पताल जो अब मेडिकल कालेज अस्पताल सह जिला अस्पताल के नाम से जाना जा रहा है। जिला अस्पताल का उन्नयन होकर मेडिकल कालेज अस्पताल का दर्जा मिल गया लेकिन समस्यायें कम नहीं हुई समस्यायें जस की तस बनी हुई हैं। मेडिकल कालेज अस्पताल में मरीजों के लिए सुविधाओं में इजाफ ा नहीं हुआ है। मेडिकल स्टाफ  में कोई खास बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। स्टाफ  की कमी का रोना आज भी रोया जा रहा है। जैसा मेडिकल कालेज अस्पताल एक बड़ा नाम है वैसा मेडिकल कालेज अस्पताल के अनुरूप सुविधायें बिल्कुल भी नहीं है। गंभीर मरीजों के उपचार के लिए चिकित्सकीय व्यवस्था न होने के कारण पहले भी गंभीर मरीज यहां से बाहर रेफ र किये जाते थे और आज भी रेफ र किये जा रहे हैं। मेडिकल कालेज अस्पताल में गंभीर मरीजों के उपचार की कोई संतोषजनक व्यवस्था नहीं है। मेडिकल कालेज अस्पताल में वर्तमान में आईसीयू की व्यवस्था है लेकिन व्यवस्थित रूप से स्टाफ  नहीं हैं। आईसीयू में बेहतर तरीके का ईलाज गंभीर मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। मेडिकल कालेज अस्पताल मे संभाग के कोरिया, सूरजपुर, सरगुजा, बलरामपुर, जशपुर समेत रायगढ़ यहां तक पड़ोसी राज्य झारखंड व उत्तरप्रदेश की सीमा में बसे मरीज भी ईलाज के लिए पहुँचते हैं। दूर-दराज से मरीज अपने मन में ये मंशा बनाकर मेडिकल कालेज अस्पताल में ईलाज कराने आता है कि वह बीमार हालत में जा रहा है औार बीमारी को अस्पताल में  छोड़कर भला चंगा होकर सकुशल अपने घर लौट आयेगा। लेकिन जब वह मेडिकल कालेज अस्पताल में आकर भर्ती होता है और उसके सामने जो वास्तविक स्थिति सामने आती है वह उसकी सोच व मंशा के विपरीत होती है। मरीज बिस्तर पर लेटा रहता है उसे डाक्टर देखने नहीं ओते सही उपचार नहीं मिलता है। सही चिकित्सा सुविधा न मिलने से मरीज अपने बेड पर भगवान भरोसे पड़ा रहता है और अपने बीमारी से जूझते रहता है। सम्पन्न लोग सही ईलाज न होने पर अपने मरीज को किसी बड़े निजी अस्पताल या बाहर ले जाकर ईलाज करा लेते हैं लेकिन गरीब मरीज जिसके पास पैसे ईलाज कराने के लिए नहीं रहते वह तो सरकारी अस्पताल के भरोसे पर ही रहता है। ईलाज के अभाव में मरीज को ठीक कराने के लिए परिजन अस्पताल लाते हैं। लेकिन ईलोज के अभाव में मरीज की मौत होने पर परिजन को आंसू पोंछते हुए मरीज के शव को वापस घर ले जाना पड़ जाता है। मेडिकल कालेज अस्पताल पूरी तरह से अव्यवस्था से घिरा हुआ है। संभाग मुख्यालय में मेडिकल कालेज अस्पताल की स्थापना हुए ४-५ साल होने को है लेकिन अभी तक पूरी तरह से मेçउकल कालेज अस्पताल व्यवस्थित नहीं हो पाया है।मेडिकल कालेज अस्पताल जैसा बड़ा नाम है वेसा नाम के अनुरूप उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा सरगुजा संभाग क मरीजों को नहीं मिल पा रही हैं । गंभीर मरीजों को बाहर रेफ र करने का सिलसिला आज भी जारी हैं।
नाम बदला पर व्यवस्था नहीं
जिला अस्पताल को मेडिकल कालेज अस्पताल का दर्जा मिल गया जिला अस्पताल का नाम बदलकर मेडिकल कालेज अस्पताल सह जिला अस्पताल हो गया पर व्यवस्था नहीं बदली हैं। जो समस्यायें व अव्यवस्थाओं पहले थी वही आज भी विद्यमान हैं। समस्यायें व अव्यवस्थायें मेडिकल कालेज अस्पताल का पीछा छोड़ने का नाम नहीं ले रही हैं।
मेडिकल स्टाफ  की कमी बरकरार
मेडिकल कालेज अस्पताल सह जिला अस्पताल में मेडिकल स्टाफ की कमी शुरू से रही है जो स्थिति मेडिकल कालेज अस्पताल हो जाने के बाद भी बरकरार है। डाक्टरों की कमी है सभी बीमारी के पर्याप्त डाक्टर नहीं है जिससे मरीजों की देखभाल नहीं हो पाती है। जो डाक्टर हैं वे अपनी सेवाओं में कही न कहीं कोताही करते हैं जिससे मरीजों को चिकित्सा लाभ नहीं मिला पाता है। स्टाफ नर्स की भारी कमी है। दिन में तो किसीर तरह वार्डों का काम चलता है लेनि रात में ४-५ वार्ड को एक या दो स्टाफ नर्स देखरती हैं जिससे उनको सभी मरीजों को देखना बड़ा मुश्किलों भरा होता है। स्टाफ  नर्सों की भर्ती प्रक्रिया सालों से लटकी हुई है जो आज भी लटकी है।
सीटी स्केन की  नहीं है व्यवस्था
मेडिकल कालेज अस्पताल बनने के पहले जिला अस्पताल में सीटी स्केन की व्यवस्था थी उस समय मरीजों को सीटी स्केन कराने में बड़ी राहत मिलती थी। लेकिन ४-५ सालों से सीटी स्केन मशीन खराब हालत में पड़े रहकर कबाड़ का रूप ले ली है। नयी सीटी स्केन की व्यवस्था नहीं की गई है जिससे मरीजों को सीटी सकेन कराने बाहर निजी सीटी सकेन सेंटरों में जाना पड़ता है जहां उन्हें भारी भरकम राशि चुकानी पड़ती है। इसी तरह से सोनोग्राफ ी व एक्सरे में भी मरीजों को परेशन होना पड़ रहा है। सोनोग्राफ ी में एक ही रेडियोलॉजिस्ट है अगर वह छुट्टी में रहे तो सोनोग्राफी
का कार्य ठप हो जाता है और गर्भवती महिलाओं व अन्य मरीजों को परेशन6 होना पड़ता है। एक्सरे में भी पर्याप्त स्टाफ  नहीं है जिससे मरीजों को एक्सरे कराने में भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अवैध वसूली व लापरवाही का लगता है आरोप
मेçउकल कालेज अस्पताल सह जिला अस्पताल में डाक्टरों व नर्सों पर अपने कार्य में लापरवाही बरतने का भी आरोप लगते रहता है। अभी हाल ही में अपने कार्य में लापरवाही बरतने के कारण राज्य सरकार के निर्देश पर एक डाक्टर व दो नर्सों को निलंबित कर दिया गया। वह मामला शांत नहीं हुआ था कि अब एक महिला डाक्टर व नर्स पर मरीज के परिजन से अवैध रूप से पैसा वसूली का आरोप लग गया जिसकी जंाच की जा रही है। जब तक डाक्टर व नर्स पूरी ईमानदारी के साथ अपने कर्म को नहीं करेंगे तब तक मेçउकल कालेज असपताल को व्यवस्थित कर पाना संभव प्रतीत नहीं होता है। मेडिकल कालेज अस्पताल में अव्यवस्था गहराई तक अपना पैर जमा चुकी है।

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