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Wednesday 19 June 2019 07:06 AM

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अयोध्या @ ये 5 जज तय करेंगे अयोध्या में क्या होगा,बाबरी या रामलला?



अयोध्या @ ये 5 जज तय करेंगे अयोध्या में क्या होगा,बाबरी या रामलला? 09-01-19 10:46:01

अयोध्या  09 जनवरी 2019। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के नेतृत्व में जस्टिस एस. ए. बोबडे, जस्टिस एन. वी. रमन्ना, जस्टिस यू. यू. ललित और जस्टिस चंद्रचूड़ की पीठ राम मंदिर विवाद में फैसला सुनाएगी...
सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की सुनवाई के लिए मंगलवार को संविधान पीठ का गठन कर दिया गया है. इसमें चीफ जस्टिस समेत 5 जज शामिल किए गए हैं. मामले की सुनवाई शीर्ष कोर्ट में 10 जनवरी को सुबह 10.30 बजे से शुरू होगी. इस बेंच में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के नेतृत्व में जस्टिस एस. ए. बोबडे, जस्टिस एन. वी. रमन्ना, जस्टिस यू. यू. ललित और जस्टिस चंद्रचूड़ शामिल हैं. पिछली बार इस मुकदमे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मौजूद हिंदू महासभा के वकील ने कहा था कि अगर नई बेंच मामले की सुनवाई रोजाना करती है तो वर्षों पुराने इस विवाद का फैसला 60 दिनों में भी आ सकता है. जानिए कौन हैं वो 5 जज जो तय करेंगे अयोध्या में बाबरी या रामलला ?
हिन्दू महासभा के वकील का कहना था कि हम 10 जनवरी को इस मामले की सुनवाई करने वाली बेंच के समक्ष अपनी बात रखेंगे और मामले में रोजाना सुनवाई की अपील करेंगे. उन्होंने बताया कि इस मामले में दोनों तरफ से अपना-अपना पक्ष रखा जा चुका है. डॉक्युमेंट्स का आदान-प्रदान हो चुका है. ट्रांसलेशन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है.
इस मसले पर तेजी से सुनवाई की मांग की जाती रही है. 6 जनवरी को अदालत ने इस मसले पर सुनवाई करते हुए इसके लिए बेंच गठित करने की बात कही थी इसके साथ ही अदालत ने 10 जनवरी को अगली सुनवाई की बात कही थी.
इससे पहले तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के साथ जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नज़ीर मामले को सुन रहे थे.
सुप्रीम कोर्ट से मुस्लिम पक्षों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा था. कोर्ट ने 1994 के इस्माइल फारुकी के फैसले में पुनर्विचार के लिए मामले को संविधान पीठ भेजने से इंकार कर दिया था. मुस्लिम पक्षों ने नमाज के लिए मस्जिद को इस्लाम का जरूरी हिस्सा न बताने वाले इस्माइल फारुकी के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की थी.
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 30 सितंबर 2010 को अयोध्या टाइटल विवाद में फैसला दिया था.फैसले में कहा गया था कि विवादित लैंड को 3 बराबर हिस्सों में बांटा जाए.जिस जगह रामलला की मूर्ति है उसे रामलला विराजमान को दिया जाए.सीता रसोई और राम चबूतरा निर्मोही अखाड़े को दिया जाए जबकि बाकी का एक तिहाई लैंड सुन्नी वक्फ बोर्ड को दी जाए.इसके बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था.


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