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Sunday 12 july 2020 04:07 AM

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रायपुर@ जूनियरों के हाथों में बागडोर



रायपुर@ जूनियरों के हाथों में बागडोर 30-06-20 01:51:06

पुराने और समर्पित कांग्रेसजनों की अनदेखी
 सीएम भूपेश बघेल राजनीतिक सलाहकारों से चर्चा कर निगम-मण्डलों में नियुक्ति की कर सकते हैं घोषणा

रायपुर,29  जून 2020 (ए)। निगम-मंडलों में नियुक्ति के लिए कुछ विधायकों की आतुरता और संगठन द्वारा इन्हें प्राथमिकता दिए जाने के संकेतों के बाद प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में इन दिनों काफी हलचल मची हुई है। पीसीसी समन्वय समिति की बैठक के बाद छत्तीसगढ़ प्रभारी पीएल पुुनिया ने दस-बारह दिनों में निगम-मंडलों में नियुक्ति कर लेने की बात कही थी। पिछले दिनों रायपुर पहुंच कर उन्होंने इस पर मुख्यमंत्री और पीसीसी अध्यक्ष से रायशुमारी भी की, कुछ नामों की जल्द घोषणा होने की खबरें भी मीडिया में आई, लेकिन नामों के सामने आने के बाद ही नेताओं में मतभेद और विवाद उभरने के चलते घोषणा अटक गई। नियुक्तियों को लेकर पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ता जो अपनी मेहनत का फल मिलने को लेकर आश्वस्त थे उनमें निराशा फैलने लगी। इस निराशा ने पार्टी के भीतर एक और चर्चा को हवा दे दी है जिसमें सालों से सक्रिय नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को कुछ सालों से कांग्रेस में सक्रिय नेताओं द्वारा हांके जाने और उनके पार्टी के प्रति निष्ठा और समर्पण की अनेदखी करने पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कांग्रेस के भीतर यह आवाज उठने लगी है कि जिनकी कांग्रेस में महज दस-बारह साल की आमद है, वे सालों से और कांग्रेस से राजनीति की शुरुआत करने वाले वरिष्ठ कांग्रेसियों पर हुकूम चला रहे हैं और अपनी मनमानी चला रहे हैं। इस तरह की सोच रखने वाले पुराने समर्पित कार्यकर्ताओं का यह भी कहना है कि पार्टी में नए-नवेले और शीर्ष पर रहने वाले कुछ नेता ही सबकुछ हो गए हैं। चुनाव के समय समर्पित और मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं को सत्ता और संगठन में भागीदार बनाने का आश्वासन देते हैं और जब इसकी नौबत आती है तो सारी मलाई आपस में ही बांट लेते हैं।
दरअसल विधानसभा, लोकसभा व अन्य चुनावों के समय प्रदेश कांग्रेस कमेटी ब्लाक लेवल से लेकर जिला और विधानसभा स्तर तक छानबिन और अन्य कमेटियां गठित करती है, ये कमेटियां किसे टिकट देना है या उम्मीदवार बनाना यह सुझाव देती हैं। लेकिन निगम-मंडलों और आयोगों में नियुक्ति के लिए जो केटेगरी बनाई गई है उस निर्धारित करने के लिए कोई नियम-मापदंड नहीं बनाए गए, सिर्फ नाम के आधार पर केटेगरी तय कर ली गई।
वर्तमान में प्रदेश कांग्रेस कमेटी में जिन्हें पद से नवाजा गया है। बहुत से नेता एवं पदाधिकारी का कांग्रेस में राजनीतिक जीवन महज 08-10 साल है जिन्हें उनसे वरिष्ठ और सीनियर कांग्रेसियों को नजरअंदाज कर पदों से नवाजा गया है। आम कांग्रेसजनों को यह बात भी नहीं पच रही है कि जिस पीएल पुनिया ने बहुजन समाज पार्टी से राजनीति की शुरुआत की, इससे पहले प्रशासनिक सेवा में रहे और कांग्रेस में जो सिर्फ दस सालों से हैं, उन्हें प्रदेश के समर्पित और कई सालों से कांग्रेस को मजबूती देने में जुटे कार्यकर्ताओं की भविष्य निर्धारित करने की जिम्मेदारी दे दी गई है। प्रदेश के इंचार्ज सेक्रेटरी पीएल पुनिया ने भले ही राजनीति सीख ली हो, लेकिन निष्ठावान कांग्रेसियों की नब्ज पहचानना उनके वश की नहीं है, विधानसभा चुनाव में भी तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल की सक्रियता और रमन सिंह सरकार के खिलाफ उसकी मुहिम और विराट धरना प्रदर्शन लगातार कड़ी मेहनत के कारण कांग्रेस को सत्ता तक पहुंचा, वरना ऐसे रणनीतिकारों के बदौलत कामयाबी की संभावना न के बराबर थी। नए-नवेले पदाधिकारियों और चाटुकारों की फौज के चलते जो लगातार सत्ता और संगठन में पहले काबिज रहे, वही अब भी कई-कई पदों पर काबिज हैं। जिन्होंने पार्टी के लिए अपना सर्वस्व लुटाया और ताउम्र कांग्रेस की मजबूती के लिए संघर्ष करते रहे ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं को आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला।
अरविन्द नेताम, गिरीश देवांगन, राजेन्द्र तिवारी, धनेश पाटिला, रमेश वर्ल्यानी , सुभाष शर्मा, किरणमयी नायक, शैलेष नितिन त्रिवेदी, पारस चोपड़ा, हाजी शेख निजामुद्दीन, शिवचंद गुप्ता, सुभाष धुप्पड़, प्रवक्ता मोहम्मद असलम, रमेश झाबक, संजय पाठक, सूर्यमणि मिश्रा, प्रमोद चौबे, अरुण भद्रा, बलविंदर सिंह गग्गी, पुष्पेन्द्र परिहार, संजीव शुक्ला, फैजल रिजवी, इमरान मेमन, रशीद भाई, विद्याभूषण, डॉ. राकेश गुप्ता, सुशील आनंद शुक्ला, अजय साहू, नारायण कुर्रे, इम्तियाज हैदर, अरुण सिंघानिया, मनोज कंदोई, पंकज महावर, आनंद मिश्रा, जलील कबीर, इदरीश गांधी, सद्दाम सोलंकी, कन्हैया अग्रवाल, घनश्याम राजू तिवारी, डॉ। रुचि दुबे, शेख निजामुद्दीन, आयश सिद्दीकी, निवेदिता चटर्जी, चौलेश्वर चंद्राकर, सतीश जैन, ललित मिश्रा, राधेश्याम विभार, सतनाम सिंह पनाग, मो। ताहीर, शेख मुशीर, दौलत रोहड़ा, प्रमोद तिवारी, गुलाब माखीजा, जसवीर ढिल्लन, अनवर हुसैन, राकेश धोत्रे, आनंद कुकरेजा, जगदीश आहुजा, ज्ञानेश शर्मा, गुरजीत सिंह संधु, संजय ठाकुर, अशोक बानी, संदीप तिवारी, बाकर अब्बास, अशोकराज आहूजा, दिनेश तिवारी, मदन तालेड़ा, निंजन हरितवाल, रेहान खान, सारिक रईस खान, अमरजीत चावला, अनीस निजामी, पप्पू राजेन्द्र बंजारे, अजय छत्रे, राजकुमार दुबे, गंगा यादव,रेखा रामटेके, साजिद मेमन,अजीज भिन्सरा, संदीप साहू, जीतू भारती, उषारज्जन श्रीवास्तव, गुलजेब अहमद, दुलारी वर्मा, रियाज अहमद, राजा भट्टर, सुंदर जोगी, बबलू गुप्ता, बनमाली साहू भावेश सोनी, निसार अहमद, सुब्रत डे, संजीव अग्रवाल जैसे सक्रिय कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं की लंबी फौज है।

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